दीपावली पर प्रदूषण के कारण एवं नियंत्रण के उपाय

दीपावली एवं प्रदूषण (Diwali and Pollution)

प्रदूषण आधुनिक युग की सबसे सबसे बड़ी समस्या बनकर उभर रहा है ग्लोबल वार्मिंग की समस्या वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड, कार्बन मोनो ऑक्साइड जैसी हानिकारक गैसों की बढ़ती मात्रा का परिणाम है। 

दिवाली पर पटाखे जलाने का भी बिल्कुल वैसा ही प्रभाव होता है क्योकि पटाखों के जलने से हानिकारक धुंए गैसों को जहरीली कर देते हैं और वायुमंडल में हानिकारक गैसों के स्तर में वृद्धि होती है जिससे ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव में वृद्धि के साथ साथ कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियाँ बहुत ही तेजी से बढ़ रही हैं। 

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दिवाली पर प्रदुषण के प्रमुख कारण

अत्यधिक मात्रा में पटाखों का जलाया जाना दीपावली के दौरान प्रदूषण स्तर में वृद्धि का प्रमुख कारण है दिवाली मुख्यतः भारत में मनाया जाना वाला हिन्दुओं का सबसे प्रमुख त्यौहार है। लोग इसे बहुत ही धूमधाम से मनाते हैं। दीपावली के दिन शाम को दिए जलाने के साथ साथ ढेर सारे पटाखे भी जलाये जाते हैं और आतिशबाजी की जाती है ये आतिशबाजी का शिलशिला दिवाली के 3-4 दिन पहले से शुरू होकर दीपावली के हफ्तों बाद ख़त्म होता है। इन पटाखों में गोले, चक्री, अनार, फुलझड़ी, स्काई शूट इत्यादि प्रमुख हैं।  इन सभी पटाखों से बहुत अधिक मात्रा में धुएं निकलते हैं जो वायु को बहुत अधिक प्रदूषित कर देते हैं। पटाखे जलाने से उत्पन्न यह धुआं कारखानों और गाड़ियों से निकलने वाले धुएं से भी कई गुना अधिक खतरनाक होता है। जो पर्यावरण प्रदूषण का प्रमुख कारण है और जो अनके प्रकार की वायु जनित जानलेवा बिमारियों का कारण भी बनता है।

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दिवाली पर होने वाले प्रदूषण को रोकने के उपाय 

अब समय की पुकार है की दिवाली को कुछ नए अंदाज में मनाया जाये। जिस प्रकार से लोग अपने अन्य मनोरंजन के साधनों में व्यापक परिवर्तन कर दिए हैं उसी प्रकार से दीपावली पर मनोरंजन के कुछ साधनों में परिवर्तन की जरूरत है। दिवाली उत्सव का पर्व है और उत्सव के ऐसे पर्व पर हमारे अंतर्मन का उत्साहित होना स्वाभाविक है। किन्तु स्मरण रहे कि प्रकृति और स्वास्थ्य एक ही सिक्के के दो पहलू हैं और इनमे से किसी की भी क्षति हमारे लिए लाभकारी नहीं है। अतः हम सभी का यह कर्तव्य है की दिवाली के शुभ पर्व पर अपने जीवन में शुभता का संचार करने के लिए अतिउत्साह में प्रकृति विरोधी कार्य न करें। हम अपनी खुशियाँ व्यक्त करने के लिए प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करते हुए पटाखे एवं आतिशबाजी के स्थान पर संगीत वादन, सजावट, लाइट डेकोरेशन, इत्यादि वातावरण के अनुकूल मनोरंजनात्मक साधनों का प्रयोग करते हुए दीपावली को और अधिक धूम धाम से मना सकते हैं। हमें दीपावली पर पटाखों एवं आतिशबाजी से होने वाले पर्यावरण प्रदूषण को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की जरूरत है। 

यहाँ हमें सिर्फ त्यागना हैं तो वो है पटाखे जिससे जहरीले धुएं निकलते हैं और वायु को प्रदूषित करते हैं। वैसे दीपावली हम तभी ख़ुशी से मनाते हैं जब घर में सब लोग स्वस्थ्य है। तो अगर हम पटाखे नही फोड़ेंगे तो वायु जनित बीमारियाँ निश्चित ही कम होंगी। घर परिवार के सभी लोग स्वस्थ्य रहेंगे और दीपावली ही नही अपितु सभी त्यौहार खूब धूमधाम से मनाएंगे। 

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प्रदूषण मुक्त दीपावली में सहयोग समाज के सभी लोगो से अपेक्षित है परन्तु ध्यान रहे शुरुआत आपको और हमें करनी है। हम सुधरेंगे तो जग सुधरेगा। तो आइये आज हम प्रण लेते हैं की अब हम प्रदूषण मुक्त दीपावली मनाएंगे। समाज, देश, संसार और प्रकृति के प्रति हम अपने कर्तव्यों का निर्वहन पूर्ण निष्ठा से करेंगे। इस बार दिवाली प्रदुषण मुक्त होगी।

प्रदूषण मुक्त दीपावली के लिए जन आंदोलन : अभी जुड़ें  


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1 Comments

  1. Nice think Esme or points ad kijiye Jaise ki aap ptakhe na jla kr or kya kr skte ho jise aapko khushi mile Jaise ki aap Kisi Gareeb ki help kr skte ho mithaiya baat skte ho jisse aapki Diwali or bhi especial Ho jayegi or pradushan bhi ni failega jisse aap or aapke aas pass ke log healthy jeevan ji skte hai.

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