पर्यावरण प्रदूषण: नियंत्रण के उपाय पर निबंध

आज के इस पर्यावरण प्रदूषण रोकने के उपाय निबंध में हम सबसे पहले प्रदूषण क्या है ? प्रदूषण क्यों है ? इस कारणों को समझकर प्रदूषण के नियंत्रण के उपाय के विषय में एक लेख लिखेंगे।



पर्यावरण प्रदूषण आज के दौर की सबसे बड़ी समस्या है। जिसकी वजह से आज मानव जीवन ही नहीं अपितु सम्पूर्ण जीवधारी परेशान है। पर्यावरण प्रदूषण ही है जिसके कारण जीवो की कुछ प्रजातियाँ विलुप्त हो चुकी हैं एवं कुछ विलुप्त होने की कगार पर हैं। मानव की जीवन प्रत्याशा दिनों दिन घटती जा रही है इस पर भी प्रदूषण  का प्रत्यक्ष रूप से असर है। वास्तव में मनुष्य ही पर्यावरण प्रदूषण के लिए मुख्यतः जिम्मेदार एवं भुक्तभोगी भी है।

पर्यावरण प्रदूषण क्या है ?


प्रकृति में सभी प्रकार के जैविक एवं अजैविक पदार्थो का एक निश्चित अनुपात होता है इस प्रकार के प्राकृतिक वातावरण को हम 'संतुलित वातावरण' कहते है। परन्तु जब इस निश्चित अनुपात में उतार चढाव आता है या सरल शब्दों में जब भी पर्यावरण में कुछ अवांछित पदार्थ मिल जाते हैं तो यही पदार्थ पर्यावण को प्रदूषित कर देते हैं।

दूसरे शब्दों में 'पर्यावरण के जैविक एवं अजैविक घटको में होने वाला किसी भी प्रकार का अवांछित परिवर्तन पर्यावरण प्रदूषण कहलाता है'।

पर्यावरण को प्रदूषित करने वाले कुछ प्रमुख पदार्थ


कार्बन मोनोऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड, क्लोरीन, अमोनिया, फ्लोरीन आदि गैसें,  धुएं, धुल, ग्रिट आदि जमे हुए पदार्थ,  डिटरजेंट्स, हाइड्रोजन, फ्लोराइड्स, फ़ास्जीन आदि रासायनिक पदार्थ, ध्वनि, ऊष्मा एवं रेडियोएक्टिव पदार्थ आदि पर्यावरण को प्रदूषित करने वाले प्रमुख पदार्थ हैं। जो अवांछित मात्रा में पर्यावरण में मिलकर पर्यावरण को प्रदूषित करते हैं।



पर्यावरण प्रदूषण रोकने के उपाय


पर्यावरण प्रदूषण पर नियंत्रण करना अब बहुत की अधिक आवश्यक हो गया है  जिसके लिए अब वैश्विक स्तर पर भी कदम उठाये जा रहे हैं। पर्यावरण प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए सर्वप्रथम जनसँख्या वृद्धि पर नियंत्रण करना आवश्यक है क्योंकि जितनी अधिक जनसँख्या होगी मानव आवश्यकताओं की पूर्ती के लिए उतनी ही अधिक प्राकृतिक संसाधनों का दुरूपयोग होगा। साथ ही वनों के कटाई पर रोक लगाते हुए वृक्षारोपण को प्रोत्साहित करना चाहिए। आम जनमानस को भी अपने तुच्छ से लाभ के लिए प्राकृति के महत्त्व को नजरअंदाज करते हुए कोई कार्य नहीं करना चाहिए। पर्यावरण प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए निम्नलिखित बिन्दु महत्पूर्ण हैं :

➤ वनों की कटाई रोकना चाहिए एवं वृक्षारोपण को प्रोत्साहित करना चाहिए साथ ही वृक्षों की संख्या अधिक होने से होने वाले लाभ के विषय में लोगों को जागरूक करना चाहिए। 

 खाद्य उत्पादन में रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग कम करके जैवक उर्वरकों के प्रयोग को बढ़ावा देना चाहिए।

 बढ़ती मानव जनसँख्या के नियंत्रण के लिए प्रयास करना चाहिए।  

 कारखानों के चिमनियों में फ़िल्टर लगाना चाहिए एवं चिमनियों को अधिक ऊंचाई पर रखना चाहिए। 

 कारखानों द्वारा निकलने वाले जल को कृत्रिम तालाबों में रासायनिक विधि द्वारा उपचारित करने के उपरांत नदियों में छोड़ना चाहिए। 

 कम शोर वाले मशीन उपकरणों के निर्माण एवं उपयोग पर जोर देना चाहिए एवं उद्योगों को शहरों या आबादी वाले स्थान से दूर स्थापित करना चाहिए। 

 परमाणु परीक्षणों पर प्रतिबन्ध लगाना चाहिए। 

 हमें सिंगल यूज़ प्लास्टिक एवं अन्य प्लास्टिक के उपयोग को रोकना चाहिए एवं पर्यावरण के अनुकूल वस्तुओं का उपयोग करना चाहिए। 

 घरेलू एवं औद्योगिक अपशिष्ट का समुचित निस्तारण करना चाहिए। 

 नवीकरणीय ऊर्जा के श्रोत के प्रयोग को बढ़ावा देना चाहिए। 

 वर्षा के जल को संचित करके उसका पुनः उपयोग कर भूमिगत जल को संरक्षित करने का प्रयास करना चाहिए। 


भौतिकता के इस दौर में मनुष्य निज स्वार्थ के लिए पर्यावरण की अनदेखी करके सम्पूर्ण जीवधारियों के जीवन को खतरे में झोकता जा रहा है। औद्योगीकरण, शहरीकरण, कल-कारखानों, परमाणु परीक्षणों आदि के कारण आज पूरा पर्यावरण प्रदूषण से ग्रषित है। पर्यावरण की सुरक्षा हम सबकी सबसे बड़ी चुनौती है। इसलिए हमें निःस्वार्थ होकर पर्यावरण प्रदूषण की समस्या को ख़त्म करने के लिए आगे आना होगा। हमें प्रत्येक कार्य करने से पहले पर्यावरण के अनुकूलता का ध्यान रखना होगा। जब पर्यावरण स्वच्छ रहेगा तभी मनुष्य स्वस्थ्य रहेगा। 

'पर्यावरण स्वच्छ - मनुष्य स्वस्थ्य'

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1 Comments

  1. सारगर्भित एवं विषय वस्तु के अनुरूप बहुत ही अच्छा लेख. मुझे आपके ऐसे लेख का इंतजार रहेगा.

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